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रत्नों की महारानी यानी मोतियों यानी शक्ति के प्रतीक के साथ एक अमिट छाप छोड़ना

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“नया नौ दिन पुराना सौ दिन” हिन्दी भाषा में इससे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला मुहावरा शायद ही और कोई हो। फिर भी, ये मुहावरा पूरी तरह से सच है। खास कर फैशन उद्योग में जहां रुझान लगातार बहुत तेज़ी से बदलते रहते हैं, बहुत सारे ऐसे भी रुझान हैं जो शुरुआत में तो उतने लोकप्रिय नहीं होते लेकिन कुछ समय के बाद बहुत अधिक पसंद किए जाते हैं। वापस पुरानी ज्वेलरी की बात करें, तो स्वाभाविक है कि ज्वेलरी का वह स्टाइल जिसका इस्तेमाल हमारे पूर्वज करते थे आज बहुत प्रचलित हो गया है। यह कारीगरों के बारीकी से किए काम का नतीजा है जो डिज़ाइन और ज्वेलरी को सदा के लिए खूबसूरत बना देते हैं। इस प्रकार की ज्वेलरी का महिलाओं द्वारा सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण है भावुकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी ज्वेलरी को आगे देने के साथ ही गहरी होती चली जाती है। दुर्लभ और प्राचीन डिज़ाइनों के साथ-साथ, इन गहनों का संबंध हर महिला की उसकी माँ/दादी से जुड़ी प्यारी यादों से भी होता है। आइए कुछ लोकप्रिय प्राचीन ज्वेलरी पर एक नजर डालें जो आज के समय में फैशनेबल हैं। बिना तराशी ज्वेलरी जैसे कि पोल्की जिसमें शुद्ध, बिना तराशे हीरे के बड़े टुकड़ों का कलात्मक रूप से भव्य चोकर और नेकलेस में इस्तेमाल किया जाता है, आज किसी भी दुल्हन की पहली पसंद है। ऐसा इसलिए क्योंकि पोल्की ज्वेलरी इतनी भव्य और आकर्षक होती है कि आसपास खड़े लोगों की नजर सीधे दुल्हन के ऊपर जाती है जिसके बाद वे उसकी तारीफ करते नहीं थकते। किसी भी महिला की एक अन्य सबसे पसंदीदा ज्वेलरी होती है झुमका/जिमिकी/कोड़ा कडुक्कन। कई सदियों से संपूर्ण भारत में पहनी जाने वाली इस प्रकार की कान की बालियाँ सचमुच में समय और फैशन दोनों से अनछुई होती हैं क्योंकि बहुत पुराने समय से ही महिलाएं इस प्रकार की ज्वेलरी को पसंद करती आ रही हैं। कई शिल्पकारों और फैशन परस्त लोगों ने मामूली से दिखने वाले झुमके में बदलाव कर उन्हें शादी के कपड़ों के साथ-साथ पश्चिमी कपड़ों के साथ पहने जाने के अनुकूल बनाया है। कड़े सोने की चूड़ियाँ होते हैं जिनमें हीरे और बहुमूल्य रत्न जड़े हुए होते हैं। वे आकार में बड़े होते हैं जिन्हें आमतौर पर जोड़ी में या बस एक के तौर पर पहना जाता है। आज के समय में महिलाएं अपने हाथों में ढेर सारी चूड़ियाँ पहनना पसंद नहीं करती हैं। आज के दौर में कम से कम लेकिन बेहतरीन ज्वेलरी पहनने की चाहत ने महिलाओं को इन कड़ों की ओर आकर्षित किया है। एक और चीज जो आज की महिलाएं बहुत अधिक पहनना पसंद करती हैं वो है नथनी। बड़ी जड़ाऊ नथनी से लेकर छोटे-छोटे हीरों से जड़ी नथनी और आकर्षक पश्चिमी डिज़ाइनों वाली नथनी तक, सभी प्रकार की नथनी को पसंद किया जाता है। मांग टिक्का आमतौर पर एक इंच लंबा सोने का पेंडेंट होता जिसमें कभी-कभार हीरों को जड़ कर उत्कृष्ट डिज़ाइन बनाया जाता है। इसे विवाहित महिला के मंगलसूत्र में पिरोया जाता है। मुख्य रूप से उत्तर भारतीय महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली इस ज्वेलरी को सभी भारतीय महिलाएं पसंद करने लगी हैं। जब बात पुरानी और प्राचीन ज्वेलरी की हो तो भारतीय तिजोरियों में ढेर सारे शानदार डिज़ाइन मौजूद हैं। मैंने तो बस इस लेख में कुछ सबसे लोकप्रिय डिज़ाइनों की जानकारी दी है क्योंकि यह सूची बहुत ही लंबी है।
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दुल्हन की ज्वेलरी चुनने का तरीका

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भारत असंख्य चीज़ों के लिए जाना जाता है। इस सूची में सबसे ऊपर है हमारी शादियाँ और उनकी भव्यता। भारतीय शादी में सुंदर कपड़े पहने दो हज़ार लोगों की भीड़ में से दुल्हन को पहचान पाना बहुत आसान होता है। ऐसा उसके द्वारा पहने गए कपड़ों और शानदार आभूषणों के कारण संभव होता है। दुल्हन को सजाते समय सही तरह के आभूषण चुनना और उन्हें पहन कर जंचना बहुत ज़रूरी होता है। तो दुल्हन के आभूषणों पर कई वर्षों की अपनी बचत खर्च करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए एक नज़र डालते हैं। नेकलाइन बनाम नेकलेस आमतौर पर उत्तर भारतीय शादियों में दुल्हन चमचमाता हुआ लहंगा पहनती है जिसमें रत्नों और रेशम के धागों से महीन डिज़ाइन बनाए जाते हैं। पोशाक का डिज़ाइन कुछ भी हो सकता है, चाहे बोट नेक या स्वीटहार्ट नेकलाइन या फिर गहरे कट वाली नेकलाइन। शादी की पोशाक के साथ गले में पहने जाने वाला आभूषण भी मेल खाता होना चाहिए। चाहे चोकर, लंबा गले का हार या दोनों की जुगलबंदी। बहुत ज़्यादा भड़कीले आभूषणों और आपकी त्वचा को सितारों और हीरों से ढक देने पर आप डिस्को बॉल दिखाई देने लगेंगी। ऐसे आभूषण चुनें जो पोशाक के साथ-साथ आपकी सुंदरता को भी उभारे। स्टाइल से करें अलग-अलग प्रकार के आभूषणों की जुगलबंदी आमतौर पर माना जाता है कि सोने, प्लैटिनम, व्हाइट गोल्ड, रोज़ गोल्ड आदि से बने आभूषण मिलाजुला कर पहनना बेढंगा लगता है। लेकिन समझदारी से और स्टाइल के साथ उन्हें पहना जाए तो वे बहुत शानदार दिखाई देते हैं। दुल्हन को चाहिए कि वह अलग-अलग प्रकार के आभूषण समझदारी से मिलाजुला कर पहने जिससे कि उसकी सुंदरता को चार चांद लग जाएँ। रंगों का मेलजोल नहीं करें ये सच है कि अलग-अलग रंग के रत्न दिखने में चमकदार होते हैं और सही वेषभूषा के साथ पहनने से उनमें से एक सुंदर आभा बाहर निकलती है। लेकिन अगर आपने एक रंग के कपड़े पहने हैं तो रंगबिरंगे रत्न पहनना सही नहीं होगा। जैसे कि, अगर आपके शादी के जोड़े का रंग हल्का है, तो एक ही रंग की चमकदार रत्नों वाला आभूषण पहनें। अगर शादी के जोड़े का रंग चमकदार है, तो हल्के रंग वाला रत्न आभूषण ही बढ़िया रहेगा। अपने शादी के जोड़े से मेल खाते आभूषण पहनें जब शादी का जोड़ा दिखने में उत्कृष्ट हो, तो हल्के-फुल्के आभूषण ही पहनने चाहिए जिससे कि उस जोड़े की सुंदरता और भव्यता निखर कर आए। इसके विपरीत, अगर आपका शादी का जोड़ा साधारण है, तो चमकदार और भव्य आभूषण पहनें जिससे कि एक भारतीय दुल्हन के रूप में आप पूरी तरह से शानदार दिखाई दें। अपने सभी आभूषण शादी वाले दिन नहीं पहनें जब बात भारतीय दुल्हन की सुंदरता की हो, तो अपने सभी आभूषण शादी वाले दिन नहीं पहनने चाहिए। समझदारी तभी होगी अगर सही आभूषण सही पोशाक के साथ सही मौके पर स्टाइल से पहने जाएँ। कभी-कभार बहुत सारे आभूषण एक साथ नहीं पहनना भी अक्लमंदी होती है। शादी के आगे भी सोचें शादी के समारोह तो कुछ ही दिन चलेंगे लेकिन आभूषण तो आने वाली कई पीढ़ियों तक चलने वाले हैं। इसलिए किसी आभूषण पर पैसे खर्च करने से पहले उसके बार-बार इस्तेमाल और किन-किन वेशभूषाओं के साथ उसे पहना जा सकता है, इसके बारे में सोचें। एक के ऊपर एक आभूषण पहनने की कला को जानें: दक्षिण भारतीय दुल्हनों के लिए ख़ास तौर पर आमतौर पर एक दक्षिण भारतीय दुल्हन सलीके से पहनी गई सिल्क साड़ी के साथ चोकर, गले के छोटे हार से लेकर लंबा हार पहनती है। अनेक प्रकार के गले के हारों को सुंदर तरीके से पहनना बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो गड़बड़ भी हो सकती है। अंत में, सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप यानी कि दुल्हन को खुद का साज शृंगार पसंद आना चाहिए। तो अपने दिल की सुनें और वो आभूषण चुनें जो आपको पसंद हों। अपने आप ही आप सुंदर दुल्हन बन जाएंगी।
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